क्या आपने किसी IPO में आवेदन किया और सोच रहे हैं कि शेयर मिलेगा भी या नहीं? कई बार IPO भारी भीड़ में ओवरसब्सक्राइब हो जाता है और हर किसी को शेयर नहीं मिलते। आवंटन का मतलब वही है — कंपनी कितने निवेशकों को कितने शेयर दे रही है और किसको क्या हिस्सा मिल रहा है।
सबसे पहले यह जान लें कि आवेदन तीन कैटेगरी में आते हैं: रिटेल (छोटे निवेशक), HNI/NII (बड़े निवेशक) और क्वांटम/कंपनी जैसा अलग हिस्सा। अगर आवेदन कुल शेयर ऑफर से कम हैं तो सभी को पूरा मिलता है। पर अक्सर ओवरसब्सक्रिप्शन होता है। रिटेल में आमतौर पर लॉट साइज़ के आधार पर लॉटरी या प्रपोर्शनल आधार पर आवंटन होता है। HNI सेक्शन में अक्सर प्रपोर्शनल आवंटन या कट-ऑफ प्राइस के हिसाब से मिलता है।
ASBA (आवेदन समर्थित ब्लॉक्ड अमाउंट) से पैसा बैंक में ब्लॉक होता है, डेबिट नहीं, जब तक आवंटन तय न हो। अगर आपको शेयर नहीं मिलता तो ब्लॉक हट जाता है और पैसा वापस उपलब्ध हो जाता है।
आवंटन चेक करने के आसान तरीकें— 1) रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जाकर PAN या आवेदन संख्या डालकर चेक करें (जैसे KFintech, Link Intime)। 2) BSE/NSE की 'IPO allotment status' पेज पर भी नाम और PAN डालकर देखा जा सकता है। 3) अपने डीमैट अकाउंट या ब्रोकिंग ऐप में 'आवंटन' सेक्शन चेक करें — कई ब्रोकर्स नोटिफिकेशन भेजते हैं। 4) अगर शेयर मिले तो वह आपके डीमैट में तभी दिखेगा जब आवंटन पूरा प्रोसेस हो और स्टॉक एडजस्ट हो जाए।
रिफंड और समय: आमतौर पर आवंटन के 2–5 कामकाजी दिन में रजिस्ट्रार आवंटन जारी करेगा और रिफंड प्रोसेस होगा। ASBA में फंड केवल अनब्लॉक होते हैं। ध्यान रखें कि बैंक डेबिट/रिफंड समय में कुछ फर्क हो सकता है।
सबसे जरूरी चीजें जिन्हें ध्यान में रखें: अपने आवेदन में सही PAN, डीपी-ID और क्लाइंट-ID भरें, एक ही कैटेगरी में दो बार आवेदन न भेजें वरना दोनों आवेदन ऑटो-रिजेक्ट हो सकते हैं।
क्या आप आवंटन की संभावना बढ़ा सकते हैं? कुछ व्यवहारिक टिप्स— 1) लाइव ओवरसब्सक्रिप्शन रेट देखें; अगर रिटेल सेक्शन बहुत ज्यादा ओवरसब्सक्राइब हो तो छोटा लाभ ही मिलता है। 2) अगर आप छोटे निवेशक हैं, कई बार लॉटरी की उम्मीद बनाए रखना चाहिए लेकिन पैसे ट्रैकर रखें। 3) कट-ऑफ पर बिड करने से आवंटन की संभावना बढ़ सकती है, पर यह भी रिस्क है। 4) किसी IPO का इंतज़ार करते समय कंपनी के फंडामेंटल और लिस्टिंग प्राइस की उम्मीद दोनों को तौलें—सिर्फ लिस्टिंग गेन के पीछे न भागें।
आईपीओ आवंटन को समझना जितना जरूरी है, उससे भी ज्यादा जरूरी है समझदारी से पैसे लगाने की आदत। छोटे नियम—सही डॉक्यूमेंट, ASBA का इस्तेमाल और रिजिस्ट्रार/ब्रोकर की स्टेटस चेकिंग—इनसे आप उलझन कम कर सकते हैं और समय पर सही जानकारी पा सकते हैं।