गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन होती है। ये पूजा भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ी है। अगर आप पहली बार घर पर पूजा कर रहे हैं तो ये गाइड आसान कदम और व्यावहारिक टिप्स देगी, ताकि पूजा शांतिपूर्ण और अर्थपूर्ण बने।
कथा सीधी है: छोटे-से गाँव के लोग प्रकृति और गौ-भक्ति से जुड़े रहे। जब इंद्र की बरसात से गाँव खतरे में था, तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों और जानवरों की रक्षा की। इसलिए यह पूजा प्रकृति, गायों और छोटे किसान समुदायों का सम्मान करती है। अन्नकूट यानी कई प्रकार के भोजन अर्पित करके कृतज्ञता जताई जाती है।
यह दिन भाईचारे और प्रकृति के साथ जुड़ने का भी संदेश देता है। अगर आप जानते हैं कि खाने, पानी और खेतों का महत्व क्या है, तो यह पूजा और भी दिल को छू लेगी।
1) तैयारी: सुबह उठकर स्नान करें। पूजा की जगह साफ रखें। मिट्टी या गोबर से छोटा सा गोवर्धन पर्वत बनाएँ। इस पर फूल, पत्ते और छोटी मिट्टी की मिट्टी की मूर्ति रखी जा सकती है।
2) सीजनल सामग्री: अगर हाथ में हो तो गाय के दूध, घी, मूंगफली और ताज़ा फल रखें। अन्नकूट के लिए घर की जो भी रेसिपी आसान हों—दाल, चावल, सब्जी, हलवा, पकौड़े—इन्हें छोटे हिस्सों में बनाएं।
3) मंत्र और आरती: सरल मंत्र जैसे "ॐ गोवर्धनाय नमः" बोलकर आरंभ करें। कृष्ण के नाम से प्रार्थना करें और अपने परिवार की भलाई की कामना करें।
4) अन्नकूट अर्पण: बनाए गए व्यंजनों को गोवर्धन पर्वत के सामने सजा कर अर्पित करें। छोटे बच्चों को जोड़ें—उन्हें बताइए कि यह कृतज्ञता का भोजन है।
5) प्रसाद और भक्षण: पूजा के बाद प्रसाद घर में बाँटें। कुछ प्रसाद गायों और पालतू पक्षियों को भी दें—यह व्रत का एक सरल और सार्थक हिस्सा है।
6) दान और सेवा: अगर संभव हो तो गरीबों को खाना खिलाएँ या आसपास के गौशाला/किसानों को दाना दें। ये छोटे काम त्योहार का असली मकसद पूरा करते हैं।
टिप्स: गोबर पर्वत बनाते समय प्लास्टिक से बचें, फूल और पत्ते स्थानीय रखें। अन्नकूट बनाते समय बहुत जंक फूड न रखें—घर की स्वादिष्ट, साधारण डिश्स ज्यादा अर्थपूर्ण होती हैं।
बच्चों को कहानी सुनाइए और पूजा में भाग दें—इससे अगले पीढ़ी को त्योहार की सच्ची वजह पता चलेगी। अगर आप शहर में रहते हैं तो घर की छोटी छत या बालकनी में भी ये पूजा आराम से हो सकती है।
गोवर्धन पूजा दिखने में सरल है पर अर्थ में गहरा। यह प्रकृति, गाय और समुदाय के प्रति सम्मान का दिन है। थोड़ी तैयारी और सच्ची भावना से आप घर पर भी यह पूजा असरदार और यादगार बना सकते हैं।