बस हादसा अचानक हो जाता है। उस पल में चौंकना सामान्य है, लेकिन कुछ ठहरकर किए गए कदम जीवन और बाद की सुविधा दोनों बचा सकते हैं। सबसे पहले खुद और आसपास के लोगों की सुरक्षा जाँचे — आग, लीकिंग फ्यूल या खतरे की स्थिति हो तो तुरंत बस से दूर चले जाएँ।
खड़े होकर या मदद करते समय आवाज़ लगाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाएँ। अगर किसी का खून बह रहा है तो तुरंत दबाव डालकर खून रोकें। गर्दन या रीढ़ में चोट का शक हो तो बिना ट्रेनिंग के किसी को इधर-उधर घुमाएँ नहीं — केवल आवश्यक होने पर ही निकाला जाए।
1) आपातकालीन सेवा बुलाएँ: 112 पर कॉल करें या स्थानीय एम्बुलेंस/पुलिस नंबर लगाएँ। घायल को अस्पताल पहुँचाने में देरी न करें। 2) पुलिस को सूचित कराएँ और मौके पर FIR/रिपोर्ट दर्ज कराएँ — MLC (Medico-Legal Case) बनवाना ज़रूरी है। 3) मेडिकल रिकॉर्ड और बिल सुरक्षित रखें — यह बाद में क्लेम और मुआवज़ा के लिए आधार होगा।
4) सबूत इकट्ठा करें: बस का नंबर, ऑपरेटर का नाम, ड्राइवर/कंडक्टर की पहचान, टिकट/रसीद की फोटो लें। मौके की तस्वीरें और वीडियो लें — सड़क की हालत, संकेत, ब्रेक के निशान, बस की स्थिति सब दर्ज करें। 5) गवाहों के नाम और फ़ोन नंबर नोट कर लें — उनकी लिखित बयान बाद में काम आएगी।
6) कपड़े और व्यक्तिगत सामान संभाल कर रखें — इलाज के समय बदला हुआ कपड़ा और चोट के निशान दावे में मदद करते हैं। 7) ऑपरेटर/बीमा कंपनी को घटना की सूचना दे दें, पर पहले पुलिस और प्राथमिक इलाज कराएँ।
FIR और MLC के बाद चिकित्सा बिल, डिस्चार्ज सर्टिफिकेट, डॉक्टर की रिपोर्ट, और मौके की फोटो-वीडियो को एक फ़ोल्डर में रख लें। बस ऑपरेटर अगर सरकारी है तो राज्य परिवहन विभाग में केस दर्ज करने में मदद लें; निजी ऑपरेटर हो तो उसकी कॉन्टैक्ट डिटेल्स और बीमा पॉलिसी नंबर माँगें।
बीमा दावा के लिए शुरुआत में क्रेप्शन/नोटिस भेजना ज़रूरी नहीं, पर पूरा डॉक्यूमेंटेशन तैयार रखें। चोट के मामले में कानूनी सलाह लें — रोड एक्सीडेंट क्लेम्स में विशेष अनुभवी वकील मदद कर सकते हैं। सामंजस्य से मुआवज़ा मिल सकता है, लेकिन अगर टालमटोल हो तो न्यायालयी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।
छोटे सुझाव जो भविष्य में काम आएँगे: बस यात्रा में सीट बेल्ट उपलब्ध हो तो बाँधें, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखें, रात में तेज रफ्तार वाले वाहनों से दूरी बनाएँ और बच्चों को खड़े रहने न दें। टिकट पर ऑपरेटर व बस नंबर हमेशा नोट रखें — ये दुर्घटना के बाद बहुत काम आते हैं।
इमरजेंसी में शांत रहना मुश्किल पर असरदार है। ऊपर दिए गए कदम अपनाएँ, प्राथमिक इलाज पर ध्यान दें और दस्तावेज़ सही तरीके से संभालें — इससे आपकी सुरक्षा और आपका हक दोनों मजबूत होंगे। जरूरत हो तो लोकल हेल्पलाइन या किसी अनुभवकार वकील से तुरंत बात करें।