एकादशी हिंदू कैलेंडर की एक खास तिथि है जब भगवान विष्णु की पूजा कर उपवास रखा जाता है। यह व्रत हर महीने की ग्यारहवीं तिथि को आता है और कई लोग इसे शारीरिक व मानसिक शुद्धि के लिए करते हैं। अगर आप पहली बार व्रत कर रहे हैं या नियम समझना चाहते हैं तो यह पन्ना आपके लिए उपयोगी होगा।
एकादशी व्रत के नियम सरल हैं पर ध्यान देना जरूरी है। सामान्य तौर पर व्रत दो तरह से किया जाता है — निर्जला (पूरी तरह पानी और भोजन से परहेज) और सरल व्रत (फलों, दूध और एकादशी विशेष अन्न जैसे साबुदाना स्वीकार)। कई लोग दिनभर उपवास रखते हैं और रात में या अगले दिन परान करते हैं।
व्रत के दौरान सामान्य नियम यह हैं: सुबह स्नान, भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी या भगवान की प्रतिमा के सामने भजन-कीर्तन या पाठ, दिनभर ब्रह्मचर्य और अहिंसा का पालन। भोजन में लहसुन-प्याज़, अनाज (कुछ एकादशियों पर), मांस व मादक पदार्थ वर्जित होते हैं। कुछ एकादशियों पर साबूदाना, आलू, फल, दूध और हल्के व्यंजन अनुमति में होते हैं।
पहला कदम: व्रत की तिथि और समय की पुष्टि कर लें। पारण (व्रत तोड़ने) का समय अक्सर सूचित होता है, उस हिसाब से ही पालन करें।
दूसरा कदम: सुबह जल्दी उठकर साफ-सफाई करें और स्नान करें। तुलसी, दीप और अगर संभव हो तो विष्णु स्तोत्र या एकादशी कथा पढ़ें।
तीसरा कदम: पूरे दिन हल्का रखें—यदि निर्जला कर रहे हैं तो पानी भी नहीं लें, वरना केवल पानी/दूध लें। ध्यान रखें कि स्वास्थ्य खराब हो तो निर्जला न करें।
चौथा कदम: परोपकार और दान करें—दैनिक जीवन में दान का विशेष महत्व है। गुड़, फल, साबूदाना आदि दान में दे सकते हैं।
व्रत खोलने के लिए अक्सर सूर्योदय के बाद या परान के समय हल्का भोजन लें। परान में अधिक भारी खाना न खाएं; दही, फल और खिचड़ी जैसी चीजें बेहतर रहती हैं।
किसे सावधानी रखनी चाहिए? गर्भवती महिलाएँ, छोटे बच्चे, बूढ़े और गंभीर बीमारी वाले लोग चिकित्सक की सलाह के बिना कड़ा व्रत न रखें। दवा ले रहे हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
एकादशी व्रत के फायदे भी मिलते हैं—धार्मिक आस्था के साथ मानसिक शांति, आत्मनियंत्रण और कई बार पाचन पर सकारात्मक असर देखा जाता है। लेकिन फायदा तभी मिलता है जब सही तरीके से और समझदारी से व्रत किया जाए।
अगर आप नियमित रूप से व्रत करना चाहते हैं तो पहले सरल व्रत करके अभ्यास कीजिए, समय और नियम समझने के बाद आप कठिन व्रत आजमा सकते हैं। सवाल हो तो अपने पंडित या चिकित्सक से सलाह लें।
यह पेज आपको एकादशी व्रत की सीधे व उपयोगी जानकारी देने के लिए है—तिथि, नियम, खाने-पीने की चीजें, दान और सावधानियाँ। अगर आप किसी विशेष एकादशी के बारे में जानना चाहते हैं (निरजला, वैकुण्ठ या मासिक एकादशी), तो नीचे दिए लेखों में तिथियाँ और कथा मिलेंगी।