फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट से ठगी: नूंह, दिल्ली और भिलाई में बड़ी कार्रवाई

फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट से ठगी: नूंह, दिल्ली और भिलाई में बड़ी कार्रवाई

जब आपका बॉस या कोई जाना-पहचाना चेहरा व्हाट्सएप पर ज़रूरत के लिए पैसे मांगता है, तो क्या आप बिना सत्यापित किए ट्रांस्फर कर देते हैं? हाल ही में हुए तीन अलग-अलग मामलों ने यह दिखा दिया है कि ऑनलाइन दुनिया में 'भरोसा' अब सबसे खतरनाक शब्द बन गया है। आसिफ, साइबर अपराधी of नूंह पुलिस की गिरफ्तारी की घटना, साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड का 20 लाख रुपये का नुकसान, और नई दिल्ली में हुई 28 लाख रुपये की ठगी—ये सभी एक ही पैटर्न को दर्शाते हैं: फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल का दुरुपयोग।

यह सिर्फ़ एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre - I4C) के डेटा से पता चलता है कि ऐसी घटनाओं में तेज़ी से इजाफा हो रहा है। आइए देखते हैं कि कैसे ये ठग अपने शिकारों को चुन रहे हैं और पुलिस किस तरह इन अंतर्राज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश कर रही है।

नूंह: छत से कूदकर भागने वाला ठग और उसकी गिरफ्तारी

हरियाणा के नूंह जिले में सिरमौर साइबर थाना की टीम ने एक चौंकाने वाली कार्रवाई की। आसिफ, जो गांव गौधोल का रहने वाला है, को गिरफ्तार किया गया। कहानी तब शुरू होती है जब भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के पोर्टल पर एक संदिग्ध मोबाइल नंबर सक्रिय पाया गया। जांच में सामने आया कि इस नंबर के खिलाफ राजस्थान के गोगामेडी थाना में ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज थी।

पुलिस की तकनीकी जांच के आधार पर टीम गौधोल पहुंची। लेकिन आसिफ बेखबर नहीं था। जैसे ही पुलिस उसके घर के पास पहुंची, उसने मकान की छत से कूदकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे दौड़ते हुए ही पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से दो मोबाइल फोन और कई कंपनियों के सिम कार्ड बरामद हुए। जांच से पता चला कि वह 'मनोज शर्मा' नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट चलाता था और लोगों को झांसे में लेकर 41,000 रुपये की ठगी करता था।

दिल्ली: कंपनी संस्थापक की फोटो और 28 लाख का नुकसान

दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन क्षेत्र में स्थित एक प्रतिष्ठित कंपनी के साथ हुआ मामला और भी गंभीर है। यहाँ ठगों ने सीधे उच्च स्तर पर हमला बोला। 21 अप्रैल को, एक अज्ञात व्यक्ति ने कंपनी के संस्थापक पवन कुमार विजय की फोटो और नाम का उपयोग करके एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया।

ठग ने कंपनी के अकाउंट विभाग में काम करने वाले कर्मचारी अखिलेश सिंह को मैसेज किया। उसने खुद को पवन कुमार विजय बताते हुए दावा किया कि वह किसी बड़े सरकारी नेता के साथ बैठक में है और उसे तुरंत 28 लाख रुपये की जरूरत है। दबाव और विश्वास के मिश्रण से अखिलेश सिंह ने रकम ट्रांसफर कर दी। जब बाद में कंपनी प्रबंधन को शक हुआ, तो उन्होंने साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। 17 जून को मामले की जांच शुरू की गई।

छत्तीसगढ़: अंतर्राज्यीय गिरोह और 'टोकन सिस्टम'

छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ मामला एक संगठित अपराध की ओर इशारा करता है। यहाँ साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्रीचंद बत्रा की फोटो लगाकर फर्जी प्रोफाइल बनाई गई। ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट को विश्वास में लेकर HDFC बैंक खाते में 20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पहली सफलता के बाद, गिरोह ने 48 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की, जिससे बात फاش हुई। दुर्ग पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर के छह आरोपियों को रायपुर से गिरफ्तार किया। इनमें पंकज शर्मा, मुरली जनगल, गोपाल सोनी, मोती सिंह, मोतीलाल शर्मा और बनवारी शर्मा शामिल हैं।

पुलिस को हस्तगत हुए सबूत चौंकाने वाले हैं: 1.2 लाख रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 10 डेबिट कार्ड और कई पहचान पत्र। जांच में पता चला कि ये लोग 'जंगी ऐप' और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करते थे और 'टोकन सिस्टम' के जरिए धन लेनदेन करते थे। वे अलग-अलग शहरों में होटलों और किराए के मकानों में रहकर अपनी गतिविधियां चलाते थे।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये मामले 'सोशल इंजीनियरिंग' के क्लासिक उदाहरण हैं। ठग तकनीक से ज्यादा मानवीय कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। वे समय के दबाव (urgency) और अधिकार के भ्रम (authority bias) का उपयोग करके शिकारों को तार्किक सोचने से रोकते हैं। "जब आपको व्हाट्सएप पर कोई अनोखी मांग मिलती है, खासकर पैसे की, तो हमेशा दूसरे माध्यम से, जैसे कॉल, सत्यापन करें," सलाह दी जाती है।

Frequently Asked Questions

फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट से ठगी कैसे होती है?

ठग किसी जानी-पहचाने व्यक्ति, बॉस, या कंपनी निदेशक की फोटो और नाम का उपयोग करके फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। फिर वे शिकार को विश्वास में लेकर, अक्सर 'आपातकालीन' स्थिति बनाकर, पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसमें सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग होता है।

नूंह में गिरफ्तार आसिफ ने कितनी ठगी की थी?

नूंह जिले के गौधोल निवासी आसिफ के खिलाफ राजस्थान के गोगामेडी थाने में 41,000 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज थी। उसने 'मनोज शर्मा' नाम से फर्जी अकाउंट चलाकर यह ठगी की थी।

साईराम व्हील्स मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?

छत्तीसगढ़ के भिलाई में साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुई 20 लाख रुपये की ठगी मामले में दुर्ग पुलिस ने राजस्थान के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें पंकज शर्मा सहित अन्य शामिल हैं जिन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

क्या मैं अपना व्हाट्सएप अकाउंट सुरक्षित रख सकता हूं?

हां, व्हाट्सएप पर 'Two-Step Verification' को सक्रिय करें। इसके अलावा, किसी भी अनजान या संदिग्ध संदेश पर ध्यान न दें। यदि कोई परिचित व्यक्ति अचानक पैसे मांगे, तो हमेशा फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से सत्यापन करें।

दिल्ली में हुई ठगी की राशि कितनी थी?

नई दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन स्थित कंपनी में, ठगों ने संस्थापक पवन कुमार विजय की फर्जी प्रोफाइल बनाकर अकाउंटेंट अखिलेश सिंह से 28,00,000 रुपये (28 लाख रुपये) की ठगी की थी।