गिरफ्तार होना किसी के भी साथ हो सकता है। जमानत असल में अदालत या पुलिस की शर्तों पर अस्थायी आज़ादी है ताकि आप मुकदमे की अगली सुनवाई तक घर जा सकें। यह आज़ादी स्थायी सजा नहीं रोकती, पर मामले की सुनवाई के लिए समय देता है।
पहला काम पैनिक न करें। शांत रहें और अपनी बातें रिकॉर्ड में कहें। अधिकारियों से अपना नाम और पता बताइए, पर खुद को बेवजह घसीटने से बचें — बिना वकील के कोई बयान लिखित न करें। अपने परिवार या दोस्त को तुरंत सूचित करने के लिए कहें। गिरफ्तारी के समय मेडिकल जांच की मांग करें अगर चोट हो।
काउंसिल/वकील को जल्द बुलाएं। अगर वकील नहीं मिल रहा, तो स्थानीय लीगल सर्विस अथॉरिटी (Legal Aid) से संपर्क करें — उन्हें सार्वजनिक वकील मिलते हैं। याद रखें, आपको माफी या डर से गलत बयान देने की ज़रूरत नहीं है।
मुख्य प्रकार हैं:
आवेदन के साथ आमतौर पर ये दस्तावेज चाहिए होते हैं: पहचान पत्र (Aadhaar, Voter ID, Passport), पता प्रमाण, जमानतस्वरूप गारंटर/सुरंटी की जानकारी, और वकील द्वारा तैयार किया गया पावर ऑफ़ अटॉर्नी या पैरवी का पर्चा। कोर्ट अलग से कोई शर्त रख सकती है — जैसे पेनल्टी, निश्चित समन का पालन और जमानती व्यक्ति का स्थानीय ठिकाना बताना।
अदालत जमानत देते समय संदिग्ध भागने का खतरा, सबूतों में छेड़छाड़ का जोखिम और अपराध की गंभीरता देखती है। हत्या, आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में जमानत मुश्किल होती है, पर हर केस अलग तर्क पर परखा जाता है।
जमानत मिलने के बाद याद रखने वाली बातें: अदालत के समन पर समय से उपस्थित रहें; नेटवर्क या सबूतों में छेड़छाड़ करने की कोशिश न करें; यदि शर्तें हैं (रिपोर्टिंग, रोक-टोक), उनका पालन करें। शर्तों का उल्लंघन करने पर जमानत रद्द हो सकती है और जमानती जब्त भी हो सकता है।
क्या जमानत रद्द हो सकती है? हां। अगर आप फरार हो जाते हैं, गवाहों को धमकाते हैं या किसी शर्त का उलंघन करते हैं तो अदालत जमानत रद्द कर सकती है और जमानती राशि जब्त कर सकती है।
अगर आप या आपका कोई जानना गिरफ़्तार हो गया है और जमानत चाहिए, सबसे अच्छा कदम है—एक जानकार वकील से तुरंत संपर्क करें और FIR/आरएफआई की कॉपी रखें। बिना वकील के काम करने से गलतियाँ होती हैं।
सवाल हैं? अपना केस और स्थितियाँ बताकर एक स्थानीय क्रिमिनल वकील से सलाह लें। आपात स्थिति में नज़दीकी पुलिस स्टेशन और कोर्ट की जानकारी पहले से रखें — ये छोटी तैयारी बड़ी मदद कर सकती है।