अगर कोई बालक (18 साल से कम) किसी आपराधिक मामले में फंस जाए तो उसे सीधे सामान्य अदालत में नहीं भेजा जाता। उसके साथ अलग तरह से पेश आता है और यही काम जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) का है। JJB का मकसद सजा ही नहीं बल्कि बच्चे की सुधार और पुनर्वास पर ध्यान देना है।
सबसे पहले यह जान लें कि बच्चे के साथ क्या अधिकार बने रहते हैं: पुलिस को बच्चे को हिरासत में लेते ही 24 घंटे के भीतर JJB के सामने पेश करना होता है, माता‑पिता या अभिभावक को तुरंत सूचित करना चाहिए, बच्चे को अलग वयस्कों से अलग रखा जाना चाहिए और उसे मुफ्त कानूनी मदद मिलनी चाहिए। बच्चे के बयान लेने से पहले उसकी सहमति और कंडीशन का ध्यान रखा जाता है।
जब कोई मामला दर्ज होता है, तो पुलिस जांच करती है पर बच्चे को तुरंत जेल में नहीं भेजा जाता। बच्चे को प्रोड्यूस करने के बाद JJB सुनवाई करता है और तय करता है कि क्या नियोक्ता‑शुल्क (बॉन्ड), काउंसलिंग, प्रॉबेशन, ऑब्ज़र्वेशन होम या किसी पुनर्वास केंद्र में भेजना बेहतर होगा। गंभीर मामलों (heinous offences) में अगर आरोपी 16‑18 वर्ष का है तो JJB यह आकलन कर सकता है कि क्या बच्चे की मानसिक और शारीरिक क्षमता अपराध करने की थी—अगर ऐसा पाया गया तो केस आगे की प्रक्रिया के लिए बच्चों की विशेष अदालत में जा सकता है।
ध्यान रखें: JJB की सुनवाई गोपनीय होती है। मीडिया में बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए। यह नियम बच्चे के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
पहला कदम शांत रहना है। पुलिस स्टेशन में बच्चे से बिना वकील के बयान न करवाएँ, माता‑पिता या अभिभावक को तुरंत बुलाएँ और Childline (1098) या नज़दीकी बाल अधिकार संगठन से संपर्क करें। मुफ्त विधिक सहायता उपलब्ध है—इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या लोकल NGOs मदद करते हैं।
अगर आप शिकायत करना चाहते हैं तो JJB, District Child Protection Unit या Child Welfare Committee से संपर्क कर सकते हैं। JJB का पता और प्रक्रिया अक्सर जिला कोर्ट या सामाजिक कल्याण विभाग की वेबसाइट पर मिल जाती है।
अंत में, याद रखें कि JJB का फोकस सजा से ज्यादा सुधार और सामाजिक पुनर्वास पर होता है। परिवार, स्कूल और समुदाय मिलकर बच्चे को सही दिशा दे सकते हैं—इसलिए अगर आपके आस‑पास कोई बच्चा मुश्किल में है तो समय पर सही मदद लें और उसे फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने का मौका दें।