विद्यालय छुट्टियाँ एक विद्यालय छुट्टियाँ, शिक्षा प्रणाली में छात्रों और शिक्षकों के लिए नियत अवधि का आराम है, जिसमें कक्षाएँ बंद रहती हैं और शिक्षण गतिविधियाँ रुक जाती हैं. यह केवल छुट्टी नहीं, बल्कि एक जानबूझकर डिज़ाइन किया गया समय है जिससे बच्चे अपने घर, परिवार और सामाजिक जीवन के साथ जुड़ सकें। भारत में यह नियम राज्य सरकार, प्रत्येक राज्य का शिक्षा विभाग अपनी छुट्टियों की तारीखें अपनाता है, जो केंद्रीय निर्देशों से अलग हो सकती हैं के हाथ में होती है, इसलिए दिल्ली में छुट्टी की तारीख बिहार या महाराष्ट्र में अलग हो सकती है।
क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक राज्य में स्कूल बंद होते हैं, तो दूसरे में वही दिन कक्षाएँ चल रही होती हैं? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भारत में शिक्षा नीति, राज्यों को अपनी सांस्कृतिक, जलवायु और धार्मिक आदतों के अनुसार छुट्टियों का खाका बनाने की स्वतंत्रता देती है। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत में दीपावली के बाद छुट्टी होती है, जबकि उत्तर में इसके बाद भी कक्षाएँ चलती हैं। इसी तरह, गर्मियों की लंबी छुट्टी का समय भी राज्य के तापमान और खेती के चक्र पर निर्भर करता है। एक छात्र के लिए यह बहुत अहम हो सकता है कि उसके मित्र या परिवार के सदस्य किस राज्य में रहते हैं—क्योंकि छुट्टियों की तारीखें उनकी यात्रा, घरेलू योजनाएँ और अध्ययन शेड्यूल को पूरी तरह बदल देती हैं।
क्या आप जानते हैं कि कुछ राज्य अब छुट्टियों को छोटा-छोटा बाँट रहे हैं? जैसे दो हफ्ते पढ़ाई, एक हफ्ता छुट्टी—इसे फ्लेक्सिबल कैलेंडर कहते हैं। इसका मकसद बच्चों को लंबी छुट्टियों के बाद अध्ययन की आदत खोने से बचाना है। इसके अलावा, बहुत से स्कूल अब अपने अंदर ही अतिरिक्त छुट्टियाँ जोड़ रहे हैं—जैसे बुक फेयर के लिए एक दिन, विज्ञान प्रदर्शनी के लिए दो दिन। ये छोटे ब्रेक बच्चों के लिए बहुत ज़रूरी हो गए हैं। आपके बच्चे के स्कूल की छुट्टियाँ कब हैं? उसका कैलेंडर आपके घर की योजनाओं के साथ मेल खाता है?
यहाँ आपको भारत के विभिन्न राज्यों में विद्यालय छुट्टियों से जुड़ी ताज़ा खबरें, राज्य सरकारों के निर्णय, और छात्रों के लिए उनके असर की जानकारी मिलेगी। चाहे आप एक माता-पिता हों, एक शिक्षक, या बस एक जिज्ञासु पाठक—यहाँ हर खबर आपके लिए कुछ नया लेकर आती है।