अगर कभी किसी ने आपको अनचाहा शारीरिक, बोले‑जुल्ले या डिजिटल व्यवहार किया जो असहज करता है, तो वह यौन उत्पीड़न हो सकता है। यह सिर्फ अजनबी नहीं करते—कभी‑कभी यह वही सहकर्मी, बॉस, रिश्तेदार या दोस्त भी कर सकते हैं। सबसे पहले अपने अनुभव को छोटा मत समझिए। यह आपकी प्रतिक्रिया है—काबिल‑ए‑गौर है।
कुछ चीजें तुरंत नज़र आती हैं: अनचाही छू‑छक, बार‑बार आपत्तिजनक संदेश, अश्लील टिप्पणियाँ, काम करने की जगह पर असम्मानजनक शब्द, या किसी कोन पर फॉलो करना। डिजिटल दुनिया में बिना सहमति के फोटो/विडियो भेजना या सेक्सुअल मैसेज भी वहीां आते हैं। अगर आप असहज हैं, तो वह गलत है—इसे पहचानना पहला कदम है।
1) अपनी सुरक्षा पहले: खतरा लगे तो तुरंत वहां से निकलें और भरोसेमंद व्यक्ति के पास जाएँ।
2) साक्ष्य बचाएँ: मैसेज, ई‑मेल, रिकॉर्डिंग, कॉल लॉग, तस्वीरें और किसी गवाह का नाम—सब सुरक्षित रखें। स्क्रीनशॉट लें और तारीख‑समय नोट कर लें।
3) दूसरों से बात करें: एक भरोसेमंद दोस्त, सहकर्मी या परिवार को बताइए। अकेले फैसला मत लीजिए—सहारा मिलने पर केस संभालना आसान होता है।
4) काम पर शिकायत करें: अगर यह workplace है तो अपनी कंपनी के प्रोसेस के मुताबिक Internal Complaints Committee (ICC) या HR को लिखित शिकायत दें। POSH कानून के तहत नियोक्ता को शिकायत सुननी और जांच करानी होती है।
5) पुलिस में शिकायत: सार्वजनिक जगह पर हुआ मामला हो या गंभीर हमले के संकेत हों तो स्थानिय थाने में FIR दर्ज कराएं। मेडिकल जांच कराना जरूरी है अगर शारीरिक नुकसान हुआ हो।
6) कानूनी और भावनात्मक मदद: वकील, काउंसलर और NGOs से संपर्क करें—वे स्टेप‑बाय‑स्टेप गाइड दे सकते हैं और कोर्ट में मदद कर सकते हैं।
क्या आप साक्ष्य नहीं जुटा पाए? अभी भी कर सकते हैं: घटना का रिकॉर्ड लिख लें—तारीख, समय, स्थान, कथन, गवाह। यह बाद में काम आता है।
रोकथाम और आसपास के लोग भी जिम्मेदार हैं। अगर आप किसी के साथ यह देखते हैं तो सुरक्षित तरीके से हस्तक्षेप करें—ध्यान हटाने की कोशिश करें, पीड़ित से अलग स्थान पर बात करें, या तुरंत अधिकारी/कर्मचारी को सूचित करें।
अगर आप नियोक्ता हैं तो स्पष्ट नीति रखें: प्रशिक्षण, शिकायत का पारदर्शी प्रोसेस, ICC की मौजूदगी और गोपनीयता की गारंटी। कर्मचारियों को बताइए कि शिकायत करने से उन पर कोई प्रतिशोध नहीं होगा।
याद रखें, मदद मिलना आपका अधिकार है। शर्म या डर की वजह से चुप न रहें। सही कदम उठाने से न सिर्फ आप बल्कि औरों को भी सुरक्षित माहौल मिलता है। जरूरत पड़े तो स्थानीय महिला आयोग, सामाजिक संस्थाएँ और कानूनी मदद उपलब्ध हैं—माँगने पर हम बताने में मदद कर सकते हैं।