किस्मत और कड़ी मेहनत जब एक साथ मिलते हैं, तो इतिहास लिखा जाता है। अंशुल कंबोज, एक ऐसा ही नाम है जिसने हरियाणा के खेतों से निकलकर क्रिकेट के सबसे कठिन प्रारूप, टेस्ट क्रिकेट में अपनी जगह बनाई है। 25 वर्षीय यह दाएं हाथ के तेज गेंदबाज अब भारत के लिए खेलने वाले 318वें टेस्ट क्रिकेटर बन चुके हैं।
कंबोज की कहानी सिर्फ आंकड़ों के बारे में नहीं है, बल्कि उस जुनून के बारे में है जो उन्हें 6 साल की उम्र से ही क्रिकेट की ट्रेनिंग दिला रहा था। करनाल के एक किसान परिवार में जन्मे अंशुल के पिता उधम सिंह ने अपने बेटे के सपने को पंख दिए। आज जब वे सफेद जर्सी में मैदान पर उतरते हैं, तो यह केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक छोटे शहर के बड़े सपनों की जीत है।
मैकग्राथ जैसा अंदाज और धोनी का मार्गदर्शन
घरेलू क्रिकेट सर्किट में अंशुल को प्यार से "मैकग्राथ" कहा जाता है। यह नाम उन्हें यूं ही नहीं मिला; वे ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज {Glenn McGrath} के गेंदबाजी दर्शन और सटीक लाइन-लेंथ के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनके करियर की शुरुआती नींव में एमएस धोनी जैसे मेंटर का हाथ रहा, जिन्होंने उन्हें खेल की बारीकियों को समझने में मदद की।
अंशुल सिर्फ एक गेंदबाज नहीं, बल्कि एक उपयोगी ऑलराउंडर भी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फरवरी 2022 में हरियाणा के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलकर की थी। उनके आंकड़े बताते हैं कि वे खेल के हर पहलू में योगदान देने की क्षमता रखते हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट के 34 पारियों में उन्होंने 486 रन बनाए हैं, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर नाबाद 51 रहा है।
विजय हजारे ट्रॉफी: वो मोड़ जिसने जिंदगी बदल दी
किसी भी खिलाड़ी के करियर में एक ऐसा पल आता है जब दुनिया उसे नोटिस करना शुरू करती है। अंशुल के लिए वह पल विजय हजारे ट्रॉफी 2023भारत था। इस टूर्नामेंट में उन्होंने 10 मैचों में 17 विकेट चटकाए, और सबसे हैरान करने वाली बात उनकी इकोनॉमी रेट थी, जो महज 3.58 थी।
टूर्नामेंट के फाइनल में जब दबाव चरम पर था, तब अंशुल ने 9 ओवरों में 34 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट लिए। इस प्रदर्शन की बदौलत हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन ने पहली बार इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर कब्जा किया। इसी शानदार प्रदर्शन ने उन्हें आईपीएल की सुर्खियों में ला दिया और 2024 की नीलामी में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 20 लाख रुपये की बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया।
रणजी ट्रॉफी में वो 'असंभव' करिश्मा
लेकिन असली धमाका अभी बाकी था। 2024-25 की रणजी ट्रॉफी में अंशुल ने वह कर दिखाया जो पिछले 91 सालों में केवल दो बार हुआ था। ग्रुप सी के एक मैच में केरल के खिलाफ खेलते हुए अंशुल ने पहली पारी के सभी 10 विकेट अपने नाम किए। उन्होंने महज 49 रन देकर पूरी टीम को समेट दिया (10/49)।
यह उपलब्धि इतनी बड़ी क्यों है? इसे ऐसे समझिए। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में उनसे पहले केवल बंगाल के प्रेमंगशु चटर्जी (1956-57) और राजस्थान के प्रदीप सुंदरम (1985-86) ने ही एक पारी में 10 विकेट लिए थे। सबसे खास बात यह है कि भारतीय क्रिकेट इतिहास में वे पहले तेज गेंदबाज बने हैं जिन्होंने प्रथम श्रेणी मैच में 10 विकेट लेने का यह कारनामा किया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड केवल स्पिनरों के नाम था।
टीम इंडिया की जर्सी और भविष्य की राह
घरेलू क्रिकेट में इस तबाही के बाद भारतीय चयनकर्ताओं ने उन्हें नजरअंदाज नहीं किया। उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए चुना गया और मैनचेस्टर टेस्ट में उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिला। एक किसान के बेटे के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था। इससे पहले उन्होंने इंडिया ए की ओर से एसीसी इमर्जिंग टीम्स एशिया कप 2024 में भी तीन मैचों में 4 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की थी।
अब सबकी नजरें आईपीएल 2025 की नीलामी पर हैं, जहां उनकी बेस प्राइस फिर से 20 लाख रुपये रखी गई है। लेकिन अब वे केवल एक 'बेस प्राइस' खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अंशुल कंबोज ने रणजी ट्रॉफी में क्या ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया?
अंशुल कंबोज ने 2024-25 रणजी ट्रॉफी में केरल के खिलाफ पहली पारी में 49 रन देकर सभी 10 विकेट लिए। वे रणजी इतिहास के तीसरे गेंदबाज और भारत के पहले ऐसे तेज गेंदबाज बने हैं जिन्होंने एक पारी में 10 विकेट झटके हैं।
अंशुल कंबोज को 'मैकग्राथ' क्यों कहा जाता है?
अंशुल ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्लेन मैकग्राथ के गेंदबाजी अंदाज और उनकी सटीक लाइन-लेंथ के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। उनकी गेंदबाजी शैली मैकग्राथ से प्रेरित होने के कारण उन्हें घरेलू क्रिकेट में यह उपनाम मिला है।
आईपीएल में उनका अब तक का सफर कैसा रहा है?
अंशुल को आईपीएल 2024 की नीलामी में मुंबई इंडियंस ने 20 लाख रुपये में खरीदा था। अपने डेब्यू सीजन में उन्होंने 3 मैच खेले और 2 विकेट हासिल किए।
अंशुल कंबोज के करियर में एमएस धोनी की क्या भूमिका रही?
करियर के शुरुआती दौर में महेंद्र सिंह धोनी उनके मेंटर और गुरु रहे हैं। धोनी के मार्गदर्शन ने उन्हें मानसिक मजबूती और खेल की रणनीतियों को समझने में काफी मदद की।
क्या अंशुल कंबोज केवल एक गेंदबाज हैं?
नहीं, अंशुल एक बेहतरीन ऑलराउंडर भी हैं। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 34 पारियों में 486 रन बनाए हैं और उनका उच्चतम स्कोर नाबाद 51 है, जो उन्हें निचले क्रम में एक उपयोगी बल्लेबाज बनाता है।