लखनऊ: आंजलि तिवारी की आत्मदाह से मौत, महिला थाने पर निष्क्रियता का आरोप

लखनऊ: आंजलि तिवारी की आत्मदाह से मौत, महिला थाने पर निष्क्रियता का आरोप

जब एक महिला आंजलि तिवारी, जो झारखंड की रहने वाली थी, न्याय की आखिरी उम्मीद को लेकर लखनऊ के विधान सभा भवन के बाहर अपने शरीर में आग लगाकर जल गई, तो यह केवल एक व्यक्तिगत ट्राजेडी नहीं बनी। यह घटना उस प्रणाली की कठोर असफलता को उजागर करती है जिसे महिलाओं की रक्षा के लिए बनाया गया था। 13 अक्टूबर 2020 को हुई इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा दिया। आंजलि, जिसने शादी के बाद इस्लाम धर्म अपनाया और आयशा नाम ले लिया थी, अपनी पति द्वारा की गई मानसिक और शारीरिक यातनाओं से बेहाल थी।

लेकिन सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि जब वह अपनी कहानी सुनाने के लिए लखनऊ के महिला थाने गई, तो वहां उसे कोई राहत नहीं मिली। पुलिस ने उसकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और न ही FIR दर्ज की। इसके बजाय, अधिकारियों ने 'सुल्ह-समझौते' का खेल खेला, जिसे आंजलि ने मना कर दिया। इस निराशा ने ही उसे आत्मदाह जैसे कदम पर उतरने पर मजबूर किया।

घटना की पृष्ठभूमि: प्यार से तकलीफ तक

आंजलि तिवारी की कहानी शुरू होती है एक साधारण प्यार से। वह गोर्खपुर से वीर भाद्र नगर आई थी, जहां उसका पति आसिफ रजा रहता था। लगभग दो साल और छह महीनों की शादीशुदा जिंदगी के दौरान, आसिफ ने आंजलि को छोड़ दिया और उसे आर्थिक सहायता भी बंद कर दी। 4 अक्टूबर को आंजलि ने अपने पति के घर के बाहर धरना देकर न्याय की मांग की थी। स्थानीय पुलिस ने उसे वहां से हटाकर थाने ले गई, लेकिन वहां उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। महिला थाने की प्रभारी ने उसके सभी आरोपों को ठुकरा दिया।

यह केवल एक मामला नहीं था; यह एक पैटर्न था। आंजलि ने बताया कि उसके पति और उनके परिवार वाले उस पर लगातार हमलावर रहे। लेकिन सिस्टम ने इसे 'परिवारिक झगड़ा' बताकर दबा दिया। जब कानून का ढांचा काम नहीं करता, तो नागरिक अक्सर चरम पाएं पर उतर जाते हैं। आंजलि के पास अब चुनौती नहीं बची थी।

विधान सभा भवन के सामने आत्मदाह

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020 की शाम, आंजलि ऑटो रिक्शा से उतरी और सीधे हजरतगंज क्षेत्र में स्थित विधान सभा भवन के पास पहुंची। विशेष रूप से, वह BJP कार्यालय के गेट नंबर 2 के सामने थी। वहां उसने अपने शरीर पर ज्वलनशील तरल पदार्थ डाला और आग लगा ली। यह दृश्य देखकर उपस्थित लोग हैरान रह गए।

पुलिस कर्मियों ने तुरंत उसे बचाने की कोशिश की और आग बुझाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आंजलि के शरीर के बड़े हिस्से जल चुके थे। उसे तुरंत लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने कहा कि उसके शरीर पर 80% से अधिक जलने के घाव थे। बुधवार, 14 अक्टूबर की शाम, आंजलि की हालत गंभीर हो गई और उसकी मौत हो गई।

मृत्यु के बाद राजनीतिक तूफान और जांच

आंजलि की मौत के बाद परिस्थितियां और भी तनावपूर्ण हो गईं। जब उसके परिवार के सदस्य मॉर्च्यूलरी पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें शव दिखाने से इनकार कर दिया। इससे परिजनों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने जेल के बाहर ट्रैफिक जाम करवा दिया। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सदल विधान सभा सदस्य मनोज प्रजापति मौके पर पहुंचे और शांति स्थापित की।

जब परिजनों ने आंजलि का शव देखा, तो उन्होंने दावा किया कि जेल अधिकारियों और कैदियों ने उसे पीटकर मारा है, न कि आत्मदाह से मृत्यु हुई है। हालांकि, रिपोर्ट्स में इस बारे में भ्रम बना हुआ था कि वह अस्पताल में मरी या जेल कस्टडी में। इस मामले की जांच एसपी प्रदीप गुप्ता, महाराजगंज के अधीन चल रही थी।

इस घटना ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित महिला थानों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। क्या ये थाने वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा के लिए हैं या केवल दिखावे के लिए? आंजलि की मौत ने इस प्रश्न को और भी तीव्र बना दिया है।

अटकलें और गिरफ्तारी

अटकलें और गिरफ्तारी

घटना के बाद, आलोक प्रसाद, पूर्व राजस्थान राज्यपाल सुखदेव प्रसाद के पुत्र, को गिरफ्तार किया गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने आंजलि को आत्मदाह के लिए उकसाया था। लखनऊ पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया और CO (सर्कल ऑफिसर) स्तर के अधिकारियों ने जांच शुरू की। यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी।

Frequently Asked Questions

आंजलि तिवारी ने आत्मदाह क्यों किया?

आंजलि तिवारी ने अपने पति आसिफ रजा और उसके परिवार द्वारा की गई मानसिक और शारीरिक यातनाओं के खिलाफ न्याय की मांग के लिए आत्मदाह किया। जब उसने महिला थाने में शिकायत की, तो पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की और न ही उसकी बात सुनी, जिससे वह निराश हो गई।

महिला थाने ने आंजलि की शिकायत पर क्या कार्रवाई की?

महिला थाने की प्रभारी ने आंजलि के सभी आरोपों को ठुकरा दिया और FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, पुलिस ने सुल्ह-समझौते का प्रयास किया, जिसे आंजलि ने मना कर दिया। यह निष्क्रियता आंजलि की आत्महत्या का मुख्य कारण बनी।

आंजलि की मौत कहाँ हुई?

आंजलि ने 13 अक्टूबर 2020 को लखनऊ के विधान सभा भवन के बाहर आत्मदाह किया था। उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां 14 अक्टूबर की शाम उसकी मौत हो गई। हालांकि, परिजनों ने दावा किया कि जेल कस्टडी में उसे पीटा गया था।

इस मामले में किसकी गिरफ्तारी हुई?

पूर्व राजस्थान राज्यपाल सुखदेव प्रसाद के पुत्र आलोक प्रसाद को गिरफ्तार किया गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने आंजलि को आत्मदाह के लिए उकसाया था। इस मामले की जांच एसपी प्रदीप गुप्ता के अधीन चल रही है।

यह मामला महिला थानों की प्रभावशीलता के लिए क्या दर्शाता है?

यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित महिला थानों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। आंजलि की मौत ने दिखाया कि कैसे सिस्टम की असफलता और पुलिस की निष्क्रियता महिलाओं को चरम पाएं पर उतरने पर मजबूर कर सकती है।